अपना ज़मीर हम दागदार नहीं करते,
हम मुस्लमान लाशो का वयापार नहीं करते..
तुम हम पे ज़रा हाथ उठा कर तोः देखो हम नगद देते है उधर नहीं करते..
हम अपनी ही नहीं गिरो की बेटियों की हिफाज़त करते हैं..
हम संत आशा राम जैसे चमत्कार नहीं करते,
उठा कर किसी की मजबूरी का फायदा अपनी बहु बेटी के साथ बलत्कार नहीं करते..
वे और होंगे जो उजाड़ दिया करते हैं गुलशन,
मुस्लमान कभी गुल को खार नहीं करते..
क्यों दे हम किसी को देश भक्ति का सर्टिफिकेट
हम हिन्द की इज्ज़त तार तार नहीं करते..
हम शेर ऐ मोहम्मदी है ये जान लो
हम सीने पे करते है छुप के वार नहीं करते..
तुम्हारी कलम उगलती है सिर्फ नफरत का ज़हर मगर हम अपने कलम की स्याही बेकार नहीं करते,
सियासतों के लिए काट देते
हो अपनों का ही गला होता नहीं है फिर
भी तुम्हारा भला..
हम बादशाह है बादशाह थे और बादशाह ही रहेंगे
हम तुम्हारी कुर्सियों का खुद को तलबगार नहीं करते..
वक़्त आया तोः हिन्द के लिए लगा देगे जान की बाजी
हम मुस्लमान है ये इंकार नहीं करते...
[[seeteshazaad]]