अपने दिल मेँ गीता
और कुरान रखता हूँ ।
किसी का दिल न दुखे
ईस बातका ध्यान रखता हूँ ।
मंदीर मस्जिद गुरुद्वारा
व चर्च के प्रति हृदय मेँ
खासा अदब,सम्मान रखता हूँ ।
इंसांन हूँ मैँ,
इंसानियत ही है मजहब मेरा ।
इश्क वास्ते हथेली पे,
मैँ अपनी जान रखता हूँ ।
दामन बचा कर चलना
मेरी फितरत है,
गंगा सा पवित्र अपना
गिरेबान रखता हूँ ।
चादर जितनी,
पसार लेता हूँ पैर उतने ।
मैँ कच्चे घर मेँ भी
नवाबी शान रखता हूँ ।
मत डालिये,
जात पात के झगड़ो मेँ,
मैँ दोस्तो मेँ कुछ सिंह
कुछ खान रखता हूँ ।
मिले सबको रोटी कपड़ा और मकान,
ख्वाबो मेँ ऐसा
एक हिंदुस्तान रखता हुं ।।